मिट्टी ऊष्णता (गर्मी) की कुचालक है अत: मिट्टी के बर्तन में भोजन पकाने से भोजन को धीरे-धीरे ऊष्णता प्राप्त होती है। परिणामस्वरूप भोजन के तत्व जैसे दाल-सब्जी के विटामिन और प्रोटीन कम नहीं हो पाते व 100% पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं । यदि काँसे के बर्तन में भोजन पकाया जाये तो 97% पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं। पीतल के बर्तन 93% पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं। एल्यूमीनियम के बर्तन में पकाने से 87% पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं और भोजन आरोग्य के लिये हानिकारक हो जाता है। भोजन में कुछ एल्यूमीनियम की मात्रा चली जायेगी जो अनेक बिमारियाँ उदाहरणार्थ दमा, अस्थमा, कैंसर, यादाश्त का कमजोर होना, शरीर के अंगों का कांपना आदि रोग पैदा कर सकती है। लाल रक्त कण भी नष्ट हो जाते हैं। मिट्टी के अंदर शरीर के लिए आवश्यक सारे खनिज तत्व हैं । मिट्टी के बर्तन में भोजन पकाने से मिट्टी के कुछ अंश भोजन में चले जाते हैं। यह मिट्टी के अंश पेट में जाने के बाद घुल जाते हैं व सारे तत्व भोजन पचने के बाद रस में मिल जाते हैं और रक्त में पहुँच जाते हैं। 16 प्रकार के खनिजों की क्षति की पूर्ति रोज हो जाती है। शरीर निरोगी रहता है। खनिजों की क्षतिपूर्ति भोजन पदार्थ (अनाज, दालें, फल, सब्जियाँ) आदि के द्वारा हो जाती है ।
हमारे शरीर को प्रतिदिन 18 प्रकार के सूक्ष्म पोषक तत्व चाहिए जो मिट्टी से ही मिलते हैं । जैसे- कैल्शियम, मैग्नीशियम, सल्फर, आयरन, सिलिकोन आदि। । मिट्टी के इन्ही गुणों और पवित्रता के कारण हमारे यहाँ पुरी के मंदिरों (उड़ीसा) में और अन्य कई मंदिरों में आज भी मिट्टी के बर्तनों में प्रसाद बनता है । अधिक जानकारी के लिए पुरी के मंदिर की रसोई देखें।